सफ़र की दुआ | Safar Ki Dua
जब भी हम लोग कही बाहर सफ़र पर जाते है – चाहे वोह बाइक, कार, ट्रेन या हवाई जहाज पर हो, तो हम अपने हिफाज़त के लिए बहुत सारे इन्तेजाम पहले ही कर लेते है।
लेकिन एक सच्चा मुसलमान अपनी हिफाज़त सिर्फ हेलमेट या सीट बेल्ट से नहीं करता है, बल्कि सफ़र की शुरुवात अल्लाह की पनाह मांगकर और रसूल उल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बताई हुए दुआ को पढ़कर करता है।
सफ़र की दुआ
سفر کی دُعا
دُعا:
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ
ترجمہ:
پاک ہے وہ ذات جس نے اس (سواری) کو ہمارے لیے مسخر کر دیا، حالانکہ ہم اس کو قابو میں لانے والے نہ تھے، اور بے شک ہم اپنے رب کی طرف لوٹ کر جانے والے ہیں۔
सफर की दुआ
दुआ:
सुब्हानल्लज़ी सख्खर लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक़रिनीन
वा इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून
अनुवाद:
पाक है वह (अल्लाह) जिसने इस (सवारी) को हमारे लिए वशीभूत किया, वरना हम इसे वश में नहीं कर सकते थे, और बेशक हम अपने रब की ही तरफ लौटने वाले हैं।
Safar Ki Dua
Dua:
Subhanalladhi sakhkhara lana haadha wama kunna lahu muqrineen
Wa inna ila Rabbina lamunqaliboon
Meaning:
Pak hai woh Allah jisne is sawari ko humare liye kaabu mein kiya, warna hum ise kabhi kaabu mein nahi kar sakte the, aur beshak hum apne Rubb ki taraf hi lautne wale hain.
सफर की सुन्नतें
1. सफर से पहले इस्तिखारा करना
रसूलुल्लाह ﷺ किसी भी अहम काम से पहले इस्तिखारा किया करते थे। इसलिए सफर से पहले भी इस्तिखारा करना सुन्नत है।
📘 सहीह बुख़ारी: 1162
2. सोमवार, गुरुवार या शनिवार को सफर शुरू करना
नबी करीम ﷺ ने इन दिनों में सफर शुरू करना पसंद फरमाया।
📘 मुस्नद अहमद: 26002
3. सफर की नियत से दो रकअत नफ्ल नमाज़ पढ़ना
यह अमल सहाबा किराम से साबित है और सुन्नत माना गया है।
📘 इब्न अबी शैबा
4. घर वालों से दुआ करवाना और अलविदा कहना
हज़रत अनस (रज़ि॰) से रिवायत है कि नबी ﷺ सफर पर जाते वक़्त फरमाते थे:
“अस्तौदिउकुमुल्लाह अल्लज़ी ला तज़ीऊ वदाइउहु”
(मैं तुम्हें उस अल्लाह के हवाले करता हूँ जिसकी अमानतें कभी ज़ाया नहीं होतीं)।
📘 मुस्नद अहमद: 12158
5. सफर के दौरान ऊँचाई पर “अल्लाहु अकबर” और नीचे उतरते वक्त “सुभानल्लाह” कहना
📘 सहीह बुखारी: 2994
सफर से जुड़ी अहम हदीसें
1. सफर आज़माइश (इम्तिहान) का एक हिस्सा है
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“सफर अज़ाब (मुसीबत) का एक हिस्सा है, जो इंसान को खाना, पीना और नींद से रोकता है। जब कोई अपना काम पूरा कर ले, तो जल्दी अपने घर लौट आए।”
📘 सहीह बुख़ारी: 1804, सहीह मुस्लिम: 1927
2. सफर में अकेले चलना मना किया गया है
नबी ﷺ ने तन्हा सफर करने से मना किया और कहा:
“अगर लोग तीन हों तो उनमें से एक को अमीर बना दो।”
📘 अबू दाऊद: 2608
3. औरत अकेले सफर न करे
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“कोई औरत बग़ैर महरम के तीन दिन का सफर न करे।”
📘 सहीह मुस्लिम: 1341
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निष्कर्ष
इस्लाम में हर छोटे-बड़े काम करने से पहले हमें अल्लाह को याद करने की तालीम दी जाती है। इसलिए सफर में जाने से पहले सफ़र की दुआ पढ़ लेना चाहिए,
जो हमारे सफर को महफूज़, बरकत वाला और अल्लाह की रहमतों से लबालब बना देता है।
आज से ही ये आदत बना लीजिए, ताकि जब भी घर से बाहर निकलें, अल्लाह को याद करें और सफर की ये प्यारी सी दुआ ज़रूर पढ़ें। यकीन मानिए, इससे सफर आसान भी होगा और सवाब भी मिलेगा।

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