पानी पीने की दुआ | Pani Peene Ki Dua
अल्लाह तआला ने इंसान को ज़िंदगी गुज़ारने के लिए कई नेमतें अता की हैं, जिसमें से एक सबसे बड़ी नेमत पानी हैं। जिसके बारे में अल्लाह तआला ने कुरआन में फरमाया है:
وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ
(“और हमने पानी से हर चीज़ को ज़िंदा किया।” – सूरह अल-अंबिया 21:30)
जिससे मालूम होता है कि पानी इंसान, जानवर और पूरी दुनिया की ज़िंदगी के लिए कितना जरूरी है। इसलिए जब भी हम पानी पिएं, तो अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और वह दुआ पढ़नी चाहिए। जो नबी-ए-करीम ﷺ ने बताई हैं।
पानी पीने की दुआ
बिस्मिल्लाह
तर्जुमा:
शुरू करता हूं मैं अल्लाह के नाम से।
Pani Peene Ki Dua
Bismillah
Tarjuma:
Shuru karta ho, Mai Allah ke naam se.
पानी पीने के बाद की दुआ
अलहम्दु लिल्लाहिल्लज़ी सक़ाना अज़्बन फ़ुरा-तन बि-रहमतिही व-लम यज-अलहु मिलहन उजाजन बि-ज़ुनूबिना
तर्जुमा:
सारी तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें अपनी रहमत से मीठा और सुखद पानी पिलाया और हमारे गुनाहों की वजह से उसे खारा और कड़वा नहीं बनाया।
Pani Peene Ke Baad Ki Dua
Alhamdu lillaahil-ladhee saqaana adhban furaatan birahmatihi wa lam yaj‘alhu milhan ujaajan bidhunoobinaa
Tarjuma:
Sab taarifein us Allah ke liye hain. Jis ne apni rehmat se hamein meetha aur khushgawar paani pilaya, aur hamare gunahon ki wajah se ise kadwa aur khara nahi banaya.
पानी पीने का सुन्नत
नबी करीम ﷺ ने हमें पानी पीने का तरीका भी सिखाया है। यह हमे हदीसों से मालूम होती हैं, तो चलिए उन सुन्नतों के बारे में जानते हैं।
- पानी पीने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ें।
- दाहिने हाथ से पानी पिएं।
- बैठकर पानी पिएं, खड़े होकर पानी पीना मकरूह है।
- एक ही सांस में पानी न पिएं, बल्कि तीन घूँटों में पिएं।
- पानी पीकर आखिर में “अलहम्दुलिल्लाह” कहें।
हदीस
🔹 हज़रत अनस (रज़ि.) फरमाते हैं:
“रसूलुल्लाह ﷺ एक साँस में पानी नहीं पीते थे, बल्कि तीन सांस में पानी पिया करते थे।”
(सहीह मुस्लिम)
🔹 रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“अगर तुममें से कोई भी बैठकर पानी पिए, तो यह सेहत के लिहाज़ से बेहतर और बरकत वाला भी है।”
(तिर्मिज़ी शरीफ़)
आजकल लोग अक्सर बिना “बिस्मिल्लाह” पढ़े पानी पी लेते हैं। लेकिन हमें बिस्मिल्लाह पढ़कर पानी पीना चाहिए और बच्चों को भी यह दुआ याद कराएँ और उन्हें सुन्नत के मुताबिक़ पानी पीने का तरीका सिखाएँ। यह छोटी-सी आदत हमारी ज़िंदगी को बरकतों और सवाब से भर देती है।
निष्कर्ष
पानी अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है। इसका सही तरीक़े से इस्तेमाल करना, सिर्फ़ इमान की अलामात नहीं है, बल्कि हमारी दुनिया और आख़िरत दोनों के लिए फ़ायदेमंद है।
इसलिए हर बार जब पानी पिएं तो “बिस्मिल्लाह” कहें, सुन्नत के तरीके से पिएं और आखिर में “अलहम्दुलिल्लाह” कहना न भूलें।
